Thursday, 16 September 2021

दक्षिण भारत में ‘इस्लामी खिलाफत’ चाहता था अल-हिंद का आतंकी : NIA की चार्जशीट

 

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) के अल-हिंद मॉड्यूल से जुड़े एक आतंकवादी के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की है। इससे पता चला है कि आतंकवादी ने दक्षिण भारत में ‘इस्लामी खिलाफत’ स्थापित करने की कोशिश में था। इस मामले में एनआईए की ओर से दायर यह दूसरी चार्जशीट है। एजेंसी द्वारा पहली चार्जशीट जुलाई 2020 में चेन्नई में विशेष एनआईए अदालत के समक्ष दायर की गई थी।

टाइम्स नाउ का दावा है यह चार्जशीट उसके पास है। इसमें बताया गया है कि आईएसआईएस आतंकवादियों ने बेंगलुरु को बेस के रूप में चुना था। 2019 से कर्नाटक और तमिलनाडु में साजिशों को लेकर कई बैठकें की थी। प्रतिबंधित आतंकवादी समूह ISIS की विचारधारा का प्रचार करने में लगा था। पुलिस अधिकारियों और हिंदू नेताओं की हत्या के लिए हथियारों और विस्फोटकों को इकट्ठा करने की साजिश रची गयी। एनआईए का कहना है कि आरोपित ने एक अज्ञात आईएसआईएस हैंडलर के साथ साजिश रची थी।

3 सितंबर को दायर चार्जशीट में चेन्नई निवासी 39 वर्षीय शिहाबुद्दीन (उर्फ सिराजुदीन और खालिद) के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी, आर्म्स एक्ट 1959 की धारा 25(1)(ए) और गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम 1967 की धारा 18, 20, 38 और 39 के तहत आरोप लगाए गए हैं। शिहाबुद्दीन को एनआईए ने जनवरी 2021 में स्पेशल सब-इंस्पेक्टर ए विल्सन की नृशंस हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। एनआईए के मुताबिक, आईएसआईएस आतंकवादी शिहाबुद्दीन मुंबई में हथियार और गोला-बारूद इकट्ठा करने और आपूर्ति करने में एक बड़ी साजिश का हिस्सा था।

जनवरी 2020 में तमिलनाडु के पुलिस अधिकारी एसएसआई विल्सन को मारने के लिए शिहाबुदीन और उसके सहयोगियों द्वारा बन्दूक और गोला-बारूद का इस्तेमाल किया गया था। एसएसआई को मारने के बाद शिहाबुद्दीन कतर भाग गया था। 6 जनवरी, 2021 को कतर से आने पर उसे एनआईए द्वारा चेन्नई हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया था।

एसएसआई विल्सन की हत्या में शुरुआती जाँच से पता चला था कि उसके हत्यारे ‘स्व-घोषित जिहादी’ थे, जिन्होंने जनवरी 2020 में बेंगलुरु में तमिलनाडु पुलिस द्वारा अपने आईएसआईएस सहयोगियों की गिरफ्तारी का बदला लेने के लिए पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने विल्सन की नृशंस हत्या के सिलसिले में 6 आरोपित आईएसआईएस आतंकवादियों के खिलाफ चेन्नई में विशेष एनआईए अदालत के समक्ष आरोप पत्र दायर किया है। चार्जशीट में विल्सन हत्या मामले में अब्दुल शमीम, वाई तौफीक, खाजा मोहिदीन, महबूब पाशा, एजस पाशा और जफर अली को आरोपित बताया गया है। इन पर आईपीसी की धारा 120 बी, 302, 353 और 506 (ii) 34 के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा यूए (पी) एक्ट 1967 के तहत 16, 18, 18बी, 20, 23, 38 और 39 और आर्म्स एक्ट की धारा 25(1बी)(ए) और 27 के तहत आरोप लगाए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि बेंगलुरु में महबूब पाशा और 16 अन्य लोगों के खिलाफ सद्दुगुंटेपल्या पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था। बेंगलुरु के गुरप्पनपाल्या के रहने वाले महबूब पाशा और खाजा मोइदीन, जो तमिलनाडु में विभिन्न आतंकवाद और हत्या के मामलों में आरोपित है, ने दक्षिण भारत में युवा मुस्लिमों की भर्ती करके एक आतंकवादी समूह का गठन किया। एनआईए ने 23 जनवरी, 2020 को मामला फिर से दर्ज किया था और 1 फरवरी को तमिलनाडु पुलिस से मामला अपने हाथ में ले लिया था। जाँच से पता चला कि आरोपितों ने अल-हिंद मॉड्यूल का गठन किया था और अप्रैल 2019 में बेंगलुरु को अपने बेस के रूप में चुना था।

चार्जशीट में यह भी कहा गया कि पुरुषों को जंगलों में जीवनयापन करने और हिंदू नेताओं और सरकारी अधिकारियों का शिकार करने के लिए प्रशिक्षित किया गया था। आरोपितों ने आतंकवादी हमले को अंजाम देने के बाद शरण लेने के लिए कोलार, कोडागु और अन्य स्थानों (कर्नाटक), जंबुसर (गुजरात), रत्नागिरी (महाराष्ट्र), चित्तूर (आंध्र प्रदेश), बर्दवान और सिलीगुड़ी आदि स्थानों पर सुरक्षित ठिकानों की पहचान की। जाँच के क्रम में आरोपितों के घरों और संपत्ति से प्रशिक्षण सामग्री जैसे धनुष, तीर, रस्सी की सीढ़ी, पानी की चरखी, जंगल के जूते, स्लीपिंग बैग, टेंट, जंबो बैग आदि जब्त किए गए। इसके साथ ही आरोपित व्यक्तियों के पास से बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री भी जब्त किए गए।

ऑनलाइन भर्ती की कोशिश

इसके अलावा एनआईए ने 25 आईएसआईएस संदिग्धों की भी पहचान की है, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे अफगानिस्तान में हैं और अफगानिस्तान संकट के बाद जिहाद के लिए भारतीयों को ऑनलाइन भर्ती करने का प्रयास कर रहे हैं। एनआईए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “बेंगलुरू आईएसआईएस मॉड्यूल में विदेशी हैंडलर की पहचान अभी तक नहीं हुई है। उनके चैट में उसका नाम ‘भाई’ है।”

संदर्भ : OpIndia

Wednesday, 15 September 2021

दिल्ली पुलिस ने किया पाक मॉड्यूल का भंडाफोड, ६ जिहादी आतंकी गिरफ्तार

 


दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मंगलवार (सितंबर 14, 2021) को पाकिस्तान के आंतकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए 6 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें 2 आतंकी ऐसे भी थे जिन्हें पाकिस्तान में ही ट्रेनिंग दी गई थी। इन 6 की पहचान महाराष्ट्र के जन मोहम्मद शेख, दिल्ली के ओसामा समी, राय बरेली के ओसामा मूलचंद, प्रयागराज के जीशान कमर, लखनऊ के मो आमिर जावेद और अबू बकर के तौर पर हुई है। इनमें जीशान और ओसामा वह हैं जिन्हें पाकिस्तान में प्रशिक्षित किया गया।

जीशान को प्रयागराज से पकड़ा गया। छानबीन में सामने आया कि वो एमबीए कर चुका है और दुबई में अकॉउंटेंट की जॉब करता था। कोरोना के कारण लॉकडाउन में वह घर लौटा और खजूर का बिजनेस शुरू कर दिया।

इनमें जन मोहम्मद शेख उर्फ समीर कालिया लंबे समय से मुंबई पुलिस की नजर में था। पेशे से ड्राइवर शेख को 2001 में एक केस में गिरफ्तार भी किया गया था। ऐसे ही लखनऊ से पकड़ा गया मोहम्मद आमिर जावेद, जीशान का रिश्तेदार था और पेशे से एक मजहबी उलेमा था। मूलचंद के बारे में बताया जा रहा है कि वो एक किसान था और दाऊद इब्राहिम की डी कंपनी के कॉन्टैक्ट में था। मो अबू बकर बहराइच निवासी था, लेकिन जेद्दाह में रहता था। उसने 2013 में देवबंद के मदरसे से तालीम ली थी। ओसामा का परिवार मेवों का बिजनेस करता था, जिसके चलते वह कई बार मिडल ईस्ट देशों में जाता रहता था। पुलिस बताती है कि वह मस्कट गया था और पानी के रास्ते पाकिस्तान पहुँचा था।

दिल्ली पुलिस ने किया पाक मॉड्यूल का भंडाफोड़

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने इन गिरफ्तारियों के संबंध में बयान जारी करते हुए बताया, “हमने एक समीर को कोटा से गिरफ्तार किया है। 2 लोग दिल्ली से पकड़े गए हैं और तीन लोग उत्तर प्रदेश से पकड़े गए हैं।” स्पेशल सेल के स्पेशल सीपी नीरज ठाकुर ने बताया, “गिरफ्तार लोगों ने कहा है कि उनके समूह में 14-15 बांग्ला भाषी व्यक्ति थे जिन्हें शायद इसी तरह के प्रशिक्षण के लिए लिया गया था। ऐसा लगता है कि इस ऑपरेशन को सीमा पार से बारीकी से कॉर्डिनेट किया गया था।”

इस पूरे मामले में आरोपित जन मोहम्मद शेख, ओसामा मूलचंद और मोहम्मद अबू बकर को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। दो अन्य आरोपित भी कोर्ट में पेशी के बाद जेल भेजे जाएँगे। जाँच में पता चला है कि संदिग्ध आतंकियों कोदा गाजी नाम के एक मेजर या लेफ्टिनेंट रैंक के अधिकारी के अंतर्गत प्रशिक्षित किया गया था। इनमें दो सब ऑर्डिनेट्स थे जिनका नाम जब्बार और हमजा है।

अलग-अलग राज्यों से पकड़े गए इन आतंकियों के निशाने पर 6 राज्यों के 15 शहर थे। नवरात्रि और रामलीला के दौरान भीड़भाड़ में हमलों को अंजाम देने की इनकी प्लानिंग थी। कुछ नामचीन भी इनके निशाने पर थे। इनके पास से विस्फोटक भी मिले हैं। यह बात भी सामने आई है कि अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का भाई अनीस इसके लिए फंड मुहैया करा रहा था। इस बड़े आतंकी हमले की साजिश पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने रची थी।

Saturday, 14 August 2021

अयोध्या में राम जन्मभूमि को दहलाने की बडी साजिश नाकाम, 4 खूंखार आतंकी गिरफ्तार

 

जम्मू-कश्मीर में स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले पुलिस ने बड़े आतंकी हमले का प्लान ध्वस्त कर जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के 4 आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार (14 अगस्त) को अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी। पुलिस ने कहा कि जम्मू में आतंकवादियों की मौजूदगी को जड़ से खत्म करने की कार्रवाई के तहत जम्मू पुलिस ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों और उनके सहयोगियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने कहा, “वे ड्रोन से गिराए गए हथियारों को इकट्ठा कर उन्हें कश्मीर घाटी में जैश के सक्रिय आतंकवादियों तक पहुँचने की योजना बना रहे थे। इसके अलावा, आतंकवादियों का 15 अगस्त को जम्मू में वाहन IED धमाका करने का प्लान था। वे देश के अन्य हिस्सों में महत्वपूर्ण जगहों की रेकी करने में भी लगे थे।”

एडीजीपी, जम्मू ने बताया कि आतंकियों की गिरफ्तारी एक बड़ी सफलता है। इससे एक बड़े आतंकी हमले को टाला गया है। उन्होंने बताया कि पुलिस आतंकियों से पूछताछ करने में लगी हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने सबसे पहले आतंकी मुंतजिर मंजूर उर्फ सैफुल्ला पुत्र मंजूर अहमद भट निवासी पुलवामा को गिरफ्तार किया। उससे पूछताछ के बाद जैश के तीन अन्य आतंकवादियों तौसीफ अहमद शाह, आतंकी इजहार खान उर्फ सोनू खान पुत्र इंतेजार खान निवासी मिरदान मोहल्ला कंडाला शामली (उत्तर प्रदेश) और जहाँगीर अहमद भट पुत्र मुश्ताक अहमद भट निवासी बांदजू पुलवामा को गिरफ्तार किया गया।

मंजूर अहमद भट आतंकवादी संगठन जैश का एक प्रमुख सदस्य है, जिसके पास से पुलिस को एक पिस्तौल, एक मैगजीन, 8 लाइव राउंड और दो चीनी हैंड ग्रेनेड बरामद हुए हैं। उसके पास से कश्मीर घाटी में हथियार सप्लाई के लिए इस्तेमाल होने वाले उसके ट्रक को भी जब्त कर लिया गया है।

श्रीराम जन्मभूमि की रेकी करने से पहले ही हुए गिरफ्तार

गौरतलब है कि गिरफ्तार हुए आतंकी इजहार खान ने खुलासा किया है कि पाकिस्तान में बैठे कमांडर मुनाजिर उर्फ शाहिद ने उसे अमृतसर के पास ड्रोन से गिराए गए हथियार को इकट्ठा कर आतंकियों को सौंपने के लिए कहा था। उसने बताया कि उसे पानीपत तेल रिफाइनरी की रेकी करने के लिए भी कहा गया था, जिसके वीडियो उसने पाकिस्तान को भेजे थे। फिर उसे अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि की रेकी करने का काम सौंपा गया, लेकिन इस काम को पूरा करने से पहले ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

Saturday, 19 June 2021

IT विभाग ने इस्लामिक संगठन PFI का 80जी पंजीकरण किया रद्द

 

आयकर विभाग ने मंगलवार (15 जून 2021) को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का 80जी पंजीकरण रद्द कर दिया है। आयकर विभाग ने कहा कि इस्लामी संगठन समुदायों के बीच ‘सद्भावना’ और ‘भाईचारे’ को खत्म कर रहा है।

22 मार्च, 2021 के एक आदेश में कहा गया है कि आईटी विभाग ने आयकर नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का 80G पंजीकरण रद्द कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि पीएफआई ने आईटी अधिनियम की धारा 13(1)(बी) और धारा 12एए(4)(ए) का उल्लंघन किया है। आयकर कानून का सेक्‍शन 80G कुछ निश्चित रिलीफ फंड्स और चैरिटेबल संस्थानों को डोनेशन या दान देकर टैक्स कटौती का लाभ पाने का विकल्प उपलब्ध कराता है।

पूर्व खंड कहता है कि धर्मार्थ संस्थानों को छूट धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए एक ट्रस्ट के मामले में या इस अधिनियम के शुरू होने के बाद स्थापित की गई धर्मार्थ संस्था के मामले में लागू नहीं होगी। यदि किसी विशेष धार्मिक समुदाय या जाति के लाभ के लिए ट्रस्ट या संस्था बनाई या स्थापित की जाती है तो उसे इसका लाभ नहीं मिलेगा।”

बाद वाले खंड में ऐसे धर्मार्थ संगठन के पंजीकरण को रद्द करने का प्रावधान है। आदेश में कहा गया है कि पीएफआई समुदायों के बीच सद्भाव और भाईचारे को नष्ट करने में लगा हुआ है। आयकर अधिनियम की धारा 80G लोगों को जनकल्याणकारी गतिविधियों में भाग लेने के लिए छूट प्रदान करती है। कुछ ट्रस्ट या चैरिटी को दान करने पर व्यक्ति कर में छूट का दावा कर सकते हैं।

पिछले साल जनवरी में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सीएए विरोधी दंगों के दौरान पीएफआई सदस्यों द्वारा की गई हिंसा के कारण पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की माँग की थी। पीएफआई के सदस्यों को अक्सर आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाया गया है, जिसमें सांप्रदायिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हत्या भी शामिल है।

फरवरी में, केरल के चेलारी में पीएफआई ने अपने स्थापना दिवस पर रैली निकाली थी। इस रैली का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। वीडियो में परेड में आरएसएस की वेशभूषा पहने कुछ युवकों को जंजीर से जकड़ा हुआ दिखाया गया था। इसके अलावा अल्लाहु अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर रसूलुल्लाह और जुलूस के दौरान नारे लगाने वाले अन्य लोगों सहित कई इस्लामी नारे लगाने वालों की पुष्टि की गई थी।

कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पीएफआई का हिंसा फैलाने का इतिहास

पीएफआई का हिंसा करने का काफी पुराना इतिहास है। नागरिकता संशोधन अधिनियम के मद्देनजर हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों और देश भर में हिंसा की जाँच के दौरान, पीएफआई की भूमिका संदिग्ध रही है और पीएफआई के कई सदस्यों को दंगों में शामिल होने के लिए गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा पिछले साल नवंबर में कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने देश के विभिन्न हिस्सों में दंगों और हिंसा के लिए उकसाने के आरोपित किसानों के विरोध को अपना समर्थन दिया और प्रदर्शनकारियों को संविधान के संरक्षण के लिए संघर्ष करने के लिए कहा था।

पीएफआई और SIMI जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठन विभिन्न राष्ट्र विरोधी गतिविधियों की फंडिंग के लिए कुख्यात हैं। दिसंबर 2019 में CAA के विरोध प्रदर्शनों के दौरान गृह मंत्रालय के साथ शेयर की गई एक खुफिया रिपोर्ट ने कुछ ‘राजनीतिक दलों’ की तरफ इशारा किया था और SIMI जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया था।

संदर्भ : OpIndia

Saturday, 3 April 2021